चीनी की कीमतों पर बवाल, क्या है सरकार का प्लान, कैसे कम होगी कीमतें?

चीनी के मुद्दे पर एक तरफ सरकार गंभीर है, तो वहीं विपक्ष हमलावर. ऐसे में सरकार ने कानूनों को कड़ा कर दिया है. सरकार ने चीनी की कालाबजारी पर लगाम लगाने को लेकर फैसला लिया है.
भारत में फिलहाल चीनी का मुद्दा छाया हुआ है, इसकी दो वजह है, पहली कीमतों में तेजी से उछाल और दूसरा रक्षाबंधन जैसा त्योहारी सीजन का होना. अब सरकार इसपर एक्शन मोड में आ गई है, लेकिन विपक्ष भी लगातार सरकार को लेकर हमलावर है. मामला तब गहराया जब चीनी के दाम 19 अगस्त को 63 रुपए किलो पहुंच गए. हालांकि, ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब चीनी के दामों में गिरावट 18 फीसदी से घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं.
इधर, जिस वजह से त्योहारी सीजन में बेलगाम चीनी की कीमतों में इजाफा हुआ था, उसको लेकर विपक्षी दल एथोनॉल में गन्ने के उपयोग को चीनी के स्टॉक में कमी बताते हुए निशाना साधने पीछे नहीं हट रहे हैं.
बेलगाम होती चीनी को कैसे रोकेगी सरकार
बेलगाम होती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने कड़े एक्शन लिए हैं. सरकार ने कच्ची चीनी आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में संशोधन किया है. इसके तहत चीनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने 2 महीने के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री को अनिवार्य कर दिया है.
सरकार ने चीनी आयात को मंजूरी दी है. विदेशी बाजार से चीनी आने के रास्ते खुलने से घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत की आशंका समाप्त हो गई है. सरकार ने साफ किया है कि चीनी की सट्टेबाजी और अवैध स्टॉक करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी और पाबंदियां लागू कर दी गई है. इससे मुनाफाखोरों पर लगाम लगेगी.
सरकार ने चीनी को लेकर किन प्रतिबंधों को लगाया है
केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत चीनी के स्टॉक की सीमा पर प्रतिबंध लगाए हैं. चीनी व्यापारी चीनी प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक उसका स्टॉक नहीं रख सकेंगे. किसी भी समय कोई व्यापारी एक स्थान पर 8,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा.
इसके अलावा, सरकारी स्टॉक या सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिए सरकार की तरफ से नामित व्यापारियों के पास रखी गई चीनी पर स्टॉक सीमा संबंधी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे. सभी चीनी व्यापारियों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल foodstock.dfpd.gov.in पर अपने चीनी स्टॉक की जानकारी घोषित करनी होगी. व्यापारियों को पोर्टल पर अपने स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करनी होगी. यह अधिसूचना 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी. महाराष्ट्र के अधिकारियों को इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही चीनी की जमाखोरी और स्टॉक जमा करने में शामिल व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
भारत में सलाना कितनी चीनी की खपत? क्यों बढ़े अचानक दाम
फिलहाल चीनी के दाम अचानक बढ़ने के पीछे असल वजह बताई जा रही है, उसमें मौसम की वजह से गन्ने की पैदावर कम हुई है. महाराष्ट्र में अधिक क्रशिंग दर, और यूपी में किस्मों से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं. इसके अलावा त्योहारी सीजन की वजह से चीनी की डिमांड बढ़ी है. वहीं ब्राजील ने आपूर्ति कम किया जाना, साथ ही जमाखोरी और सट्टेबाजी भी बड़ी वजह बनकर उभरी है. थोक खरीददारों ने चीनी का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में कीमतों में उछाल आ गया. कमी ही कीमतों में उछाल मुख्य वजह है. भारत में सालाना चीनी की खपत लगभग 280-285 लाख टन है.
विपक्ष चीनी पर हमलावर है, यूपी CM बोले- कोई कमी नहीं
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने चीनी के दामों पर तंज कसते हुए कहा कि क्या चीनी के दाम बढ़ने की वजह इथेनॉल है या सरकार की गलत नीतियां है.
शिवसेना-उद्धव गुट के संजय राउत ने केंद्र और पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आम जनता पर महंगाई का भारी दबाव बढ़ रहा है.
कांग्रेस ने कहा है कि महंगाई मैन मोदी का कहर जारी है. जहां महंगी होती चीनी चाय का स्वाद कड़वा कर रही है. वहीं प्याज के बढ़ते दाम जनता को रुला रहे हैं. सिर्फ चीनी, प्याज ही नहीं, खाने-पीने का हर सामान लगातार महंगा हो रहा है. लोग परेशान हैं और उनकी रसोई का बजट बिगड़ रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी महंगा मशरूम खाकर मस्त हैं, उन्हें जनता की कोई फिक्र नहीं.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में चीनी की कोई कमी नहीं है. प्रदेश में एक महीने की चीनी खपत 4 लाख टन है, जबकि हमारे पास कुल 28 लाख टन चीनी का स्टॉक मौजूद है. इस प्रकार लगभग 7 महीने का चीनी स्टॉक उपलब्ध है. हम 15 अक्टूबर, 2026 से फिर चीनी मिलें चालू करेंगे.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा है, त्योहारों से पहले चीनी की मिठास में मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट घुल गई है. उन्होंने सरकार से तीन सवाल पूछे हैं.
1. दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में आज चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों है? नौबत निर्यात रोकने और 10 लाख टन चीनी duty-free आयात करने तक कैसे पहुँच गई?
2. तीन महीने में चीनी करीब 40% महंगी हो गई —त्योहारों से पहले जनता पर पड़ी इस महंगाई की मार का जिम्मेदार कौन है?
3. जब देश में चीनी की कमी है और सरकार विदेश से चीनी मंगा रही है, तो गन्ने और अनाज को E20 के लिए Ethanol बनाने में झोंकने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं हो रही?
ये कैसा ‘आत्मनिर्भर भारत’ है? पहले चीनी का उत्पादन घटा, फिर स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर पहुंचा, अब विदेश से चीनी आयात कर रहे हैं — और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए Ethanol में झोंक रहे हैं.




