सुल्तानपुर। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, समान पीएलआई भुगतान समेत विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का सुल्तानपुर में व्यापक असर देखने को मिला। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की अधिकांश शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और शाखाओं पर ताले लटके रहे। बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने से करोड़ों रुपये के लेनदेन और कारोबार पर असर पड़ा।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर शुक्रवार को आयोजित हड़ताल में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। सुल्तानपुर क्षेत्र की शाखाओं में कर्मचारियों की गैरमौजूदगी के चलते ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मांगों पर सहमति के बावजूद लागू नहीं हुई व्यवस्था बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 5 Days Banking की मांग पर सहमति बनने के बावजूद इसे अब तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा समान पीएलआई भुगतान सहित कई अन्य मांगें भी लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर बैंक संगठनों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
हड़ताल से पहले UFBU और भारत सरकार के बीच सीएलसी के माध्यम से कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कर्मचारी संगठनों के मुताबिक बातचीत किसी ठोस एवं सकारात्मक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया गया।
क्षेत्रीय कार्यालय के सामने प्रदर्शन
हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारियों ने क्षेत्रीय कार्यालय के सामने प्रदर्शन और सभा कर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। संगठन के क्षेत्रीय सचिव आनंद तिवारी ने हड़ताल को सफल बताते हुए कहा कि कर्मचारियों ने एकजुटता का परिचय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों के अनुसार आंदोलन के अगले चरण में 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय भी लिया गया है।
करोड़ों के कारोबार पर पड़ा असर
ग्रामीण बैंक की शाखाओं में लेनदेन बंद रहने से नकद निकासी, जमा, ऋण संबंधी कार्य, बैंक ड्राफ्ट समेत कई नियमित सेवाएं प्रभावित हुईं। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था का बड़ा हिस्सा ग्रामीण बैंकों पर निर्भर होने के कारण हड़ताल का सीधा असर आम खाताधारकों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ा। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहीं, लेकिन शाखा स्तर पर होने वाले जरूरी कार्यों के ठप रहने से ग्राहकों को असुविधा हुई। एक दिन की हड़ताल ने बैंकिंग कारोबार पर बड़ा असर डाला और आने वाले दिनों में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है।
सभा को आनंद दूबे, बीपी उपाध्याय, सुरेंद्र पांडेय, अमरेंद्र सिंह, ऋषि यादव, अमित मिश्रा, आदित्य सिंह, आशुतोष द्विवेदी, आकाश प्रताप, रुद्र बहादुर सिंह, अनुराग तिवारी समेत संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया। प्रदर्शन में शशांक श्रीवास्तव, दीपांशु, हरीश पांडेय, रितेश मिश्रा, संतोष वर्मा, संदीप, प्रकाश गुप्ता, सुमित, अमृतेश, अभय और गुलशन सहित बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
समीक्षा: एक दिन की हड़ताल ने जहां बैंक कर्मचारियों की एकजुटता और संगठनात्मक ताकत को सामने रखा, वहीं शाखाओं का कामकाज बंद रहने से यह भी स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों की बैंकिंग व्यवस्था में इन संस्थानों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। अब निगाहें सरकार और बैंक संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर हैं। मांगों का समाधान नहीं हुआ तो प्रस्तावित तीन दिवसीय और उसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं पर और व्यापक असर पड़ सकता है।

नीरज तिवारी (प्रबंध संपादक)
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